What is BCCI ? BCCI कैसे बना Cricket का बादशाह ?

What is BCCI?

19 नवंबर 2023 वर्ल्ड कप फाइनल की इस रात को कौन भूल सकता है हमारा सबका सपना था कि 1983 में जो कपिल देव ने किया और 2011 में जो धोनी ने किया जो सचिन को शानदार विदाई दी वैसा ही हाल 2023 में भी हो लेकिन शायद भगवान को कुछ और ही मंजूर था हर बड़ा छोटा बच्चा बूढ़ा आप मैं सब उदास है

और ये गम सालों तक हमें सताएगा लेकिन आज एक बहुत बढ़िया चीज आपको मैं बताने वाला हूं उस दिन शायद हम क्रिकेट का एक मैच जरूर हाथ गए हो लेकिन क्रिकेट की दुनिया में हमने ऐसा मैच जीत लिया है कि हमें आने वाले कई वर्षों तक कोई हरा नहीं पाएगा 1983 से लेकर 2023 में क्या फर्क आया आपको कुछ घटनाओं से समझते हैं 1983 में जो वर्ल्ड कप जीता था कपिल देव जी ने उस टीम को सम्मान देने के लिए गिफ्ट देने के लिए भारतीय क्रिकेट बोर्ड के पास कोई पैसा नहीं था उनके पैसे जुटाने के लिए हमारी स्वर कोकिला लता मंगेशकर जी को एक कंसर्ट ऑर्गेनाइज करना पड़ा था और उसके पैसों से जाके उनका सम्मान हो पाया था 1983 में इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड ने भारत को दो एक्स्ट्रा टिकट देने से मना कर दिया था और आज 2023 में भारत करोड़ों रुपए के टिकट बेच रहा है एक-एक मैच की टिकट एक-एक लाख की जा रही है तो भी लोग ले रहे हैं और बीसीसीआई जहां खड़ा है उसमें धीरू भाई अंबानी का बहुत बड़ा हाथ है  ये मोटा भाई के पिताजी आए हैं यहां पे और वो आते हैं तो काम बड़े होते हैं बीसीसीआई करोड़ों रुपए कमाता है पर टैक्स नहीं देता है |

बीसीसीआई 1983 में इतना गरीब क्यों था?

और अगर इतना अमीर अभी बना है तो रास्ते में ऐसा क्या घट गया भाई साहब ये बीसीसीआई या भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड

कहां-कहां से पैसे कमाता है पैसे कमाने के तरीके क्या-क्या हैं

आईसीसी जो क्रिकेटिंग दुनिया की शीर्ष अथॉरिटी है वो भी बीसीसीआई से डरती है क्यों कोई भी ऐसा क्रिकेट बोर्ड नहीं है जो भारत के खिलाफ कुछ बोल जाए क्रिकेट की दुनिया में भारत की आवाज के बिना एक पत्ता भी नहीं हिलता ऐसा क्यों होता है जब बड़े-बड़े क्रिकेट बोर्ड की फाइनेंशियल हालत खराब हो जाती है तो बीसीसीआई के आगे हाथ क्यों जोड़ते हैं तो चलिये सुरू करते है

what is BCCI ?

आज सुनिए हमारे फेवरेट खेल को जो चलाने वाली संस्था बीसीसीआई (BCCI) भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के जीरो से हीरो बनने की कहानी ये कहानी बताती है नेवर एवर मेस विद भारत क्योंकि अगर भारत की हट गई ना वो सबको हटा देगा |

 Why BCCI was so poor  बीसीसीआई इतना गरीब क्यू था ?

कहानी शुरुआत करते हैं 1983 के वर्ल्ड कप से 1983 के वर्ल्ड कप में बीसीसीआई भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की क्या हालत थी ? फाइनल हो रहा था इंडिया और वेस्ट इंडीज के बीच में किसी ने नहीं सोचा था कि यार ये दोनों टीमें फाइनल में पहुंचेगी यह वेस्ट इंडीज का तो फिर भी पता था पर इंडिया पहुंचेगी किसी को नहीं पता था मैच हो रहा था इंग्लैंड में तो अगर इंग्लैंड में मैच हो रहा है और इंग्लैंड की टीम फाइनल में नहीं है तो स्टेडियम लगभग खाली सा पड़ा है उसी समय इंडिया के एक यूनियन मिनिस्टर सिद्धार्थ शंकर रे  किसी विजिट से ऑफिशियल विजिट से लंदन आए हुए थे तो उन्होंने कहा यार मैं और मेरी पत्नी जाके अपनी भारतीय टीम फाइनल में आई है मैच देख के आते हैं उन्होंने बीसीसीआई प्रेसिडेंट को फोन किया कि यार दो एक्स्ट्रा टिकट अरेंज करा दो स्टेडियम तो खाली पड़ा है अब बोर्ड का प्रेसिडेंट बोल रहा है कि हमारी टीम फाइनल में है दो टिकट करा दो अपने इंडिया में तो पार्षद सरपंच करा देते इतना जुगाड़ तो वहां बीसीसीआई प्रेसिडेंट फोन लगा रहा है यूनियन मिनिस्टर के लिए इंग्लिश क्रिकेट बोर्ड ने कहा नहीं है टिकट जाओ कोई बात नहीं बात आई गई हो गई लेकिन जो उस समय बीसीआई के प्रेसिडेंट थे एनकेपी सालवे ये बात उनको चुप गई किरकिरी हो गई बोले यार अब यार यह तो नहीं चलेगा कुछ तो इनका करना पड़ेगा यह तो इन्होंने ज्यादा ही दिखा दिया अच्छा उस समय अगर अपन देखेंगे तो वर्ल्ड कप शुरुआत हुआ था 1975 से तो 1975 79 83 ये तीनों वर्ल्ड कप इंग्लैंड में ही हो रहे थे उन्होंने कहा यार इंग्लैंड में वर्ल्ड कप हो रहा है उसको इसी बात का कमेंट है पहली बार तो वर्ल्ड कप इंग्लैंड से बाहर लेके जाएंगे अच्छा दूसरी चीज एक आप कह सकते हैं कि सर उस समय भारत ने विरोध क्यों नहीं किया एनकेपी एसए नहीं कर देते वैसे नहीं कर देते उस समय सर हमारे बजट की आपको हालत बताता हूं बीसीसीआई चल रहा था लॉस में हम हमारे खिलाड़ियों को कपिल देव जो भाई साहब उस लेवल पे परफॉर्मर है उनकी जो सैलरी थी वो थी 1500 पर मैच और उनको ₹200 डेली अलाउंस मिलता था

जो अपने खिलाड़ियों को ये देता हू तो सोचो क्या बजट होगा और क्या विरोध करेगा 1983 में जब वर्ल्ड कप जीत के खिलाड़ी आए

तो बोर्ड ने कहा रे खिलाड़ी जीत के तो आ गए फ इनको इनाम देने के लिए इनका सम्मान करने के लिए कुछ है ही नहीं फिर लता मंगेशकर जी बीच में आई लता मंगेशकर जी ने फ्री में कौनसाड ऑर्गेनाइज किया ₹20 लाख रेज किए उस धनराशि से इनको पुरस्कार दिया गया तो सैलरी पैसा पैसे देने हमारे पास थे नहीं ना सम्मान के पैसे ना खेलने के पैसे लेकिन फिर भी उन्होंने कहा नाक पे आ गई तो आ गई और आपको पता है भारतीय की हटी तो फिर हटी अब तीन बार से वर्ल्ड कप हो रहा था इंग्लैंड तो इन्होंने कहा भैया कुछ करना पड़ेगा तो उन्होंने बात करी उस समय के जो एयर मार्शल नूर खान जी पीसीबी के प्रेसिडेंट थे पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के उनके साथ बैठ के बात की बोले भाई साहब ऐसा है कि वर्ल्ड कप वहां से तो निकालो अपन आपस में कहीं भी कर लेंगे पर एक बार वहां से तो बाहर निकाला जाए तो इन्होंने आपस में लॉबिंग कर ली ऑस्ट्रेलिया को भी साथ में ले लिया बाकी को भी साथ में ले लिया कि इंग्लैंड में नहीं होने देंगे तो आईसीआई में जब वोटिंग हुई कि  अगला वर्ल्ड कप कहां होगा तो इन्होंने वोट वोटिंग सार एक पक्ष में कर दी और 16 ,12 के वोट के अंतर से यह पहली बार वर्ल्ड कप इंग्लैंड से बाहर गया और यह भारतीय धरती पर 87 में हुआ अगर कोई भी कंट्री अपने यहां वर्ल्ड कप कर रही है तो वो बाकी मेंबर कंट्री को पैसा देती है कि चलो तुम वर्ल्ड कप में पार्ट ले रहे हो हम होस्ट है तुम आओ उस समय इंग्लैंड सबको 20000 $  देता था इन्होंने कहा40  40000 $ देंगे तुम तो हमारे फेवर में बोलो तो पहले ही बजट कंगाल हालत और 20000 की जगह पूरी टीम को 40000$ कमिटमेंट कर दिया पर जैसे नाक पई ले दे के 87 में वर्ल्ड कप को लेके आ गए इंडिया में वर्ल्ड कप की अप्रूवल तो आ गई 87 में यहां होगा पैसे तो है ही नहीं भाई साहब इनको 400 40000$ देने एक एक टीम को फिर मैच की व्यवस्था करनी है ट्रेवलिंग की व्यवस्था करनी है फूड की करनी है होटल की करनी है करे तो करे क्या जाए तो जाए कहां इस पूरे वर्ल्ड कप के आयोजन के लिए उस समय इनको पैसे की आवश्यकता थी 20 करोड़ की और स्पनर शिप की जब बात गई तो स्पों सरशिप से टोटल आए 38 लाख अब 20 करोड़ की जरूरत है 38 लाख आए तो बाकी पैसे कहां से आए तो प्रेसिडेंट साहब गए उन्होंने गवर्नमेंट से हेल्प मांगी उस समय राजीव गांधी जी ने लगभग चार करोड़ की इनको सहायता की लेकिन 4 करोड़ से भी होना कुछ नहीं था फिर फाइनली आपको पता है कि जब ऐसी कोई भी स्थिति होती है बिजनेसमैन ही है जिसके पास आप जा सकते हो और वो फंड की व्यवस्था कर सकता है और उस समय भारत के सबसे बड़े बिजनेसमैन और इन चीजों में आगे बढ़ने वाले थे एक ही हमारे मोटा भाई के पापा जी धीरु भाई अंबानी  जी एंटर हुए


उन्होंने उस समय ₹6 करोड़ दिए

और कहा और कोई सुविधा है तो मुझे बताना लेकिन 1987 के वर्ल्ड कप का नाम था  रिलायंश वर्ल्ड कप था

जैसे वीर अंबानी के सहयोग से  वो वर्ल्ड कप हुआ वो वर्ल्ड कप मे हार गए हमारे हाथा जीत तो नहीं लगी  लेकिन हम एक तरह से डिप्लोमेटिक जीत चुके थे कि हम वर्ल्ड कप इंग्लैंड से बाहर ले आए और हमारी धरती पे मैच करवा दिया एक आकाश चोपड़ा के इंटरव्यू की रियल  क्लिप है अगर आप देखेंगे एक टाइम था जब ये ऑस्ट्रेलिया में क्रिकेट खेलने जाते थे हमारी टीम बॉल खरीदने के पैसे नहीं होते थे अगर हम  टूर पे जा रहे हैं तो वहां पे मान लो 50 बॉल खेलने के लिए चाहिए वो तो जैसे-तैसे अरेंज करके दे दी जाती थी पर प्रैक्टिस के लिए 200 250 बॉल की और आवश्यकता होती थी वो नॉर्मल बॉलर से प्रैक्टिस करनी पड़ती थी उस बॉल से प्रैक्टिस करने तक के पैसे नहीं थे थे हमारे पास अब ये तो हालत हुई कि कितने हम गरीब थे और कैसे हमने जुगाड़ कर कर के जैसे-तैसे हम पहुंचे यहां तक

How BCCI became rich .

उस समय से देखा जाए तो ब्रॉडकास्टिंग राइट पे दूरदर्शन की मोनोपोली थी दूरदर्शन ने कहा जो भी ब्रॉडकास्ट होगा हम ही ब्रॉडकास्ट करेंगे और बीसीसीआई को बेचारे को ज्यादा पता नहीं था बीसीसीआई ने बकायदा हर मैच के प्रसारण के ₹ 5लाख बीसीसीआई दूरदर्शन को देता था कि हम मैच कर रहे हैं प्लीज दिखा दो फिर एक टर्निंग पॉइंट आया जैसे एनकेपी सालवे जी ने एम किया था टर्निंग पॉइंट आया अपने नाम सुना होगा शायद जो पुराने क्रिकेट से जड़े हैं

 JAGMOHAN DALMIYA JI

वो बने बीसीसीआई के प्रेसिडेंट उन्होंने कहा यार ये बात तो गड़बड़ है तो उन्होंने बकायदा कोर्ट में जाके इसके खिलाफ केस लड़ा कि जो ब्रॉडकास्टिंग के जो राइट वाइट है ना दूरदर्शन के थोड़ी है तो हम क्रिकेट करा रहे हैं हम कराएंगे ये राइट तो हमारे हैं कोर्ट केस हुआ बकायदा कोर्ट केस जीते और फिर बीसीसीआई को मिला कि चलो ब्रॉडकास्टिंग राइट तुम्हारा है ये पैसा तुम्हारे हाथ में आएगा अच्छा उस समय तक इंटरेस्टिंग बात ये है कि देखो 1991 से पहले का पीरियड था तो भारत में बहुत ज्यादा कमर्शल इजेशन नहीं था टीवी नहीं थे कुछ भी नहीं था तो उस समय इनको पता नहीं था कि हमारे पास कितनी खतरनाक वैल्यू है पर 91 में जाके जब लिबरलाइजेशन हुआ और बाकी बाजार खुला और बाकी कंपनियां आने लगी तब इनको अपनी असली औकात समझ में आई साउथ अफ्रीका टीम इंडिया में आई दौरा करने और इंडिया साउथ अफ्रीका का मैच हुआ तब साउथ अफ्रीका के टीम के प्रशासन ने बीसीसीआई से पूछा ब्रॉडकास्टिंग राइट के कितने पैसे देने हैं अब बीसीसीआई ये बात समझ नहीं  कि देने हैं हम तो खुद ही पैसे देते हैं आप कह रहे हो कि तो आप हमको पैसे दोगे बोले हां सब देते तो हैं आप क्या लेते नहीं क्या तो उनको तब पता पड़ा कि बस हमारे पास तो इतना बड़ा हथियार पड़ा है इस चीज की जिसके हम पैसे देते थे दिखाने के 5 लाख बल्कि हमको तो पैसे लेने चाहिए इस बात के और पहली बार ब्रॉडकास्टिंग राइट का पैसा वो साउथ अफ्रीका वाले मैच में इनके हाथ में आया फिर 1993 में 1993 में इंग्लैंड के खिलाफ एक मैच हुआ उस समय 600000$  इन्होने ब्रॉडकास्टिंग फीस के लिए जो लगभग उस समय के 2 करोड़ होते थे तो तब जाके बीसीसीआई को लगा कि अपने पास भी कमाई का एक जरिया है उसके बाद धीरे-धीरे करते करते स्पॉन्सरशिप कमाते कमाते 2006 ,2007 तक इन्होंने 650 करोड़ से ज्यादा कमा लिए थे और 6,7 का फिगर के बाद 2008 में एक ऐसी घटना घटी उसके बाद इनको मुड़ के देखने की जरूरत नहीं है

वो कौन सी घटना थी

आपको पता है कमेंट  बॉक्स में बता देना लेकिन मैं आपका सब्र का इम्तहान नहीं लेता वो घटना थी

आईपीएल आईपीएल आने के बाद जो बीसीसीआई की जिंदगी में और किस्मत में बदला हुआ है वो पहले कभी नहीं हुआ था वैसा अब आईएल को चाहे कोई लाख गाली दे या कुछ भी करे लेकिन आईएल बीसीसीआई के लिए तो चमकता सितारा है इसी ने इसको बेताज बादशाह बनाया है

INCOME SOURCES OF BCCI .

 मोस्ट इंपोर्टेंट चीज यहां पे अगर आप गेम को समझ गए तो फिर आपको आगे  भी इजी हो जाएगा कैसे-कैसे कमाते हैं उसके तरीके सुन लेते हैं सबसे पहला तरीका होता है ब्रॉडकास्टिंग राइट बेज के पैसे कमाना ब्रॉडकास्टिंग राइट का मतलब होता है कि भैया किस चैनल को या किस ओटीटी प्लेटफार्म को राइट है इस मैच का प्रसारण करने का तो बीसीसीआई ब्रॉडकास्टिंग राइट बेचता है एक कंपनी को एक प्लेटफार्म को जो उसका प्रसारण करेगी और वो प्रसारण करने वाली कंपनी ऐड खरीदती है बीसीसीआई को हमेशा ज्यादा पैसे मिलते हैं बाकी किसी बोर्ड के कंपैरिजन में क्योंकि सबको पता है कि जिस मैच में इंडिया खेलेगी वहां पे 5 या 10 करोड़ लोगों की views आना नॉर्मल बात है और जहां 5 या 10 करोड़ लोग मैच देख रहे हो होंगे वहां पे कंपनियां बड़े-बड़े एडवर्टाइजमेंट के पैसे दगी जो अभी आपने IPL के दौरान देखा कि यार 10 सेकंड के ड के ₹19 लाख रेट चल रही थी फाइनल की रेट 10 सेकंड की ₹25  लाख तक चली जाती है इंडिया पाकिस्तान मैच होता है उसकी 10 सेकंड की रेट 30 लाख तक चली जाती है तो ये कैसे जाती है की  उनको पता है इतने लोग देखने वाले हैं तो वो 10 सेकंड के 30 लाख भी जनता देती है अब ऐसा किसी और बोर्ड में पॉसिबल नहीं है

आप समझो इंडिया और पाकिस्तान का मैच हो रहा है तो इंडिया वाले देखेंगे तो पैसे ज्यादा मिलेंगे अगर मैच हो रहा है पाकिस्तान और बांग्लादेश का तो देखने वाली संख्या इतनी सी रह गई तो जो उस मैच को ब्रॉडकास्ट करेगा बहुत सस्ते रेट में बेचेगा बीसीसीआई का जो सीक्रेट ब्रह्मास्त्र है वो यह है हमारे भारत की क्रिकेट लविंग जनता यानी आप यानी मैं कि अपन लोग जब तक मैच देखते रहेंगे बीसीसीआई के पास पैसे आते रहेंगे और इसी चक्कर में जब किसी भी बोर्ड की हालत खस्ता हो जाती है मान लो ऑस्ट्रेलिया बोर्ड है जिस कह रहा है भैया पैसे ही नहीं बचे नुकसान हो रहा है मोटे पैसे कमाने हैं कैसे कमाएं बोले या इंडिया से मैच कर लो इंडिया से पांच मैच की सीरीज कर लेंगे उसके बहुत मोटे ब्रॉडकास्टिंग राइड बिकेंगे उसमें से भैया आधा हम हमको मिलेगा हमारी फाइनेंशियल हालत सुधर जाएगी ऑस्ट्रेलिया की हालत खराब है वो कह रहा है मैं श्रीलंका से मैच कर लेता हूं वो श्रीलंका से मैच कर लेगा तो क्या ही तो राइट ब किंगर कही पैसे मिलेंगे तो एवरीवन हर बोर्ड इंटरेस्टेड है कि यार इंडिया से मैच हो जाए तो मजा आ जाए तो बीसीएस एक हमारा ब्रॉडकास्टिंग राइट्स है  वो बाउंड्री पे जो लिखा हुआ है भैया वो उससे कमाते हैं स्टेडियम के दौरान जो टिकट फूड सेल्स होती है मर्चेंडाइज सेल होती है उससे कमाते हैं तो इतना सब करने के बाद आज की डेट में जो बीसीसीआई की नेटवर्थ है वो है 25000 करोड़ और सालाना जो कमाई होती होती है 4500 करोड़ तो 1983 के टाइम क्या गरीबी थी और आज 2023 के दिन पे  क्या अमीरी है अगले आप समझो आईसीसी हमारे आगे एक शब्द नहीं बोल सकता कैसे ये इस पार्ट में समझते हैं बीसीसीआई इकलौता क्रिकेट बोर्ड तो है नहीं वर्ल्ड में ऐसे बहुत सारे बोर्ड हैं लेकिन आईसीसी बहुत ज्यादा घबराता है क्यों क्योंकि कमाऊ पूत के ताने हर कोई सुनता है दूध देने वाली गाय के लात हर आदमी को सहन होती है आईसी का 80 पर रेवेन्यू इंडिया से आता है तो हमारा बोर्ड सबसे ज्यादा कमाता है क्लियर हमारे खिलाड़ी भी सबसे ज्यादा कमाते हैं टॉप 10 खिलाड़ी की लिस्ट जब भी आएगी क्रिकेट की उसमें 10 में से सात आठ इंडिया के ही होंगे किसी भी टीम की हालत पतली हो जाए जैसे मैंने अ आपको समझाया वो इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड जो एक जमाने में हमको दो टिकट के लिए तरसा रहा था जब उसकी फाइनेंशियल हालत खस्ता हो जाती है तो साल में एक दो बार बीसी के हाथ जरूरी उता कि भाई साहब प्लीज यार एक मैच करा दो ताकि थोड़ी बहुत बैलेंस शीट सुधर जाए हमारा दबदबा क्या है आपको दबदबा बताता हूं 2008 में डीआरएस का रूल आया जितनी भी इस बोर्ड थे सबने सहमति दे दी हां डीआरएस लगाएंगे डीआरएस लगाएंगे बीसीसीआई ने ऑब्जेक्शन कर दिया नहीं जी हमको नहीं समझ आ रहा डीआरएस डायरेक्ट नहीं लगा सकते जो कैप्टन है वो डिसाइड करेगा सब बोर्ड एग्री थे एक तरफा लेकिन BCCI ने ऑब्जेक्शन डाल दिया तो उन्होंने कहा अरे बड़े लोग हैं इनके बीच में क्यों बोले उन्होंने कहा नहीं नहीं BCCI आप जैसे बोल रहे हो वैसे ही करेंगे दूसरा एग्जांपल आपको किस-किस को मंकी गेट याद है हरभजन सिंह ने एंड्रू सायमंड का मजाक उड़ा दिया था और बहुत बड़ा हल्ला मच गया था उस बात का आईसीसीआई ने एक्शन लेते हुए तीन मैच के लिए हरभजन सिंह को लीलंबित कर दिया

बीसीसीआई ने कहा ये बात अच्छी नहीं लगी हमारे खिलाड़ी को ऐसे कैसे कर दिया आईसीसीआई बैकफुट पे आया कहा कोई निलंबन लमन नहीं है छोटी सी पेनल्टी लगा के कहा खेलो आप तो तीसरी डोमिनेंस आपको याद है एक जमाने में काला सा एंपायर था स्टीव बकनर हमारे सचिन को कई बार नोट आउट को आउट किया याद है हमारे बीसीसीआई ने शिकायत की ये हमको ठीक नहीं है ये बंदा हमारे लिए बायस आदमी है उसको एंपायर के पैनल से हटा दिया है कोरोना काल चल रहा था हर चीज के लिए मनाई थी कि भैया कोई मैच नहीं कुछ भी नहीं बीसीसीआई ने कहा हम करा ले आईएल आईसीआई ने कहा तुम तो करा लो तुम बड़े लोग हो तुम्हें कौन मना करेगा और जब IPL होता है उस समय ICC कोई बड़ा टूर्नामेंट रखता ही नहीं है हमारे अलग से विंडो दे रखी है कि दो महीने माई बाप आपके हम 10 महीने में कर लेंगे हमारा जो कुछ करना है ये है डोमिनेंस यह दबदबा हमको अब मिल रहा है जब हम मेंस क्रिकेट में राजा हैं और अब धीरे-धीरे अगर आप देख रहे हैं पिछले दो-तीन सालों से वूमेंस क्रिकेट को भी धीरे-धीरे बीसीसीआई मजबूत कर रहा है और अगर वहां भी धीरे-धीरे हम राजा हो गए तो अगले 20-25  साल तक तो मेंस क्रिकेट ही इतना डोमिनेंट है कि कुछ होने नहीं देगा और वूमेंस भी आ गया ना तो अगले 50 साल तक क्रिकेट में जो हमने कह दिया ना वही चलेगा हमारा खोटा सिक्का भी चलेगा मैच की जो हार का गम है देखो वो तो कभी जाएगा ही नहीं वो तो अभी भी सपने में आ जाता है कि यार उस दिन कुछ और हो जाता है एक विकेट और ले लेता लेकिन कोई नहीं सर जब जब वो गम आए ये स्टोरी याद रखना कि एक मैच हारे जीते उसमें क्या है क्रिकेट तो हमने वैसे ही जीत लिया है अरे जाते जाते एक बात तो मैं भूल गया एक आंसर जो आपको मैंने शुरुआत में प्रोज किया था बीसीसीआई टैक्स क्यों नहीं देता बीसीसीआई एक  ट्रस्ट बना था कि भैया हम तो एक ट्रस्ट हैं जो क्रिकेट को प्रमोट करेगी तो एज अ ट्रस्ट बना हुआ था और आज भी इसका लीगल स्टेटस ट्रस्ट ही है इसलिए बीसीसीआई कितनी भी कमाई कर ले वो ₹1 भी टैक्स नहीं देता बाकी किसी भी क्रिकेट वाले पोर्शन पे हां IPL वाले पोर्शन को इन्होंने कहा या प्रमोशन नहीं है तो अलग ही चीज है तो IPL  से जितनी भी इनकम होती है उस पे जरूर टैक्स इनको देना पड़ता है बाकी उसके अलावा भी पूरे वर्ल्ड कप में जो जो कमाया ना व सब टैक्स फ्री है भाई साहब बीसीसीआई की इस मजबूती का एक ही राज है आपका और मेरा क्रिकेट के प्रति प्यार जब तक ये प्यार बना रहेगा हमारा डोमिनेंस बना रहेगा तो क्रिकेटर से प्यार करते रहिए क्रिकेट से प्यार करते रहिए हमारा झंडा ऐसे ही बुलंद रहेगा फिर पाकिस्तान हो या इंग्लैंड सबको धूल चटाए धन्यवाद जय हिंद

 

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